नवजात शिशुयो की कैसे करे देख-रेख How to care Newborn baby tips in Hindi

माँ बनना एक खास एहसास It is a special feeling to be a mother

माँ बनना एक ख़ास एहसास होता हैं ये उपरवाले का एक ऐसा तोहफा (surprise gift) हैं जिसकी कोई कीमत नही ये एक बेशकीमती (priceless) तोहफा हैं। जैसे ही पता चलता हैं की आप उम्मीद से हैं तो उसका एहसास ही अनमोल हैं। गर्भावस्था (Pregnancy) का ये पहला मौका जीवन में एक बडा बदलाव ले आता है। इससे आपकी खुशी (your happiness) और ज्यादा बढ जाती है ये चार गुना होता हैं। इसमें आपको अपनी जिम्मेदारी का भी एहसास (feelings) होने लगता है। इस दुनिया में एक बच्चे को लाने की जिम्मेदारी, उसकी देखभाल, पालन -पोषण (upbringing) और कई अन्य जिम्मेदारियों के एहसास से मन पुलकित हो उठता है। इस पल की खबर भर से आप कई तरह के सपने बुनने लग जाती हैं। लेकिन पहले गर्भधारण का एहसास जहां रोमांचित (Thrilled) करता है, वहीं पहली बार मां बनने पर कई सारी बातें जानने की उत्सुकता भी बढ जाती है। कैसे नौ माह का सफर बीतेगा, हर चीज सही होगी या नहीं, अपना और बच्चे का कैसे खयाल रख पाऊंगी। ऐसे तमाम खयाल मन में आते हैं। अगर आपको पहले मातृत्व की खुशखबरी (happiness of motherhood) मिल चुकी हैं तो यहां दी गई हिदायतों पर गौर जरूर फरमाएं और नौ माह के इस सफर को खुशनुमा और आरामदेह बनाएं।

नाजुक है ये दौर This round is fragile

गर्भधारण के शुरुआती तीन महीने काफी नाजुक होते हैं, क्योंकि इसी दौरान बच्चे का स्वरूप बनता है। इस काल को ऑर्गेनोजेनेसिस कहा जाता है। इन तीन महीनों में बहुत सतर्क और सावधान रहने की जरूरत होती है। पहली बार मां बनने वाली स्त्रियों को अपनी गायनिकोलॉजिस्ट की सलाह का गंभीरता से पालन करना जरूरी होता है। गर्भवती स्त्रियों (Pregnant lady) के लिए शुरुआती तीन महीने काफी महत्वपूर्ण (Most important) होते हैं, क्योंकि इस दौरान ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। इसी अवधि में शरीर में कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं। लिहाजा घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस तरह के बदलाव और शिकायतें सामान्य बातें हैं। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल के डॉक्टर अमित शाह बताते हैं कि स्त्री को अपने खानपान पर अधिक ध्यान देना जरूरी है। वे क्या और कितना खाती हैं, इन सब पर नजर रखनी जरूरी है। किसी प्रकार के असामान्य लक्षण पर भी ध्यान रखना होगा। हालांकि कुछ स्थितियों में घबराने (Hesitate) की जरूरत नहीं है लेकिन किसी तरह के असामान्य लक्षण (Abnormal symptoms) की जानकारी तत्काल अपने कंसल्टिंग डॉक्टर को देनी चाहिए ताकि हालात पर शुरुआती चरण में ही काबू पाया जा सके।

माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव की कैसे करे नवजात शिशु की देख-रेख Important tips for parents how to take care of newborn baby

पहली बार माता–पिता बनने वाले जोड़ों के लिए अपने नवजात शिशु के साथ शुरूआती कुछ महीने काफी अस्त–व्यस्त हो सकते हैं। आपको नवजात शिशु की देखभाल के बारे में हर तरह की सलाह मिलेगी और उनमें से कुछ एक दूसरे के विपरीत opposite) भी होंगी। नवजात शिशु की देखभाल के संबंध में किस सलाह को मानना चाहिए यह तय करना दुविधापूर्ण (Miscreant) हो सकता है। नवजात शिशु की देखभाल करना थका देने वाला और चुनौतीपूर्ण (Challenging) होता है, लेकिन यह आपके जीवन के सबसे अद्भुत (Magical) और अतुलनीय अनुभवों (Incredible experience) में से एक भी होता है।

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स्तनपान Breast feeding

बच्चे को समय-समय (Time to time) पर स्तनपान करवाना बहुत जरूरी है। एक नवजात शिशु को हर 2 से 3 घंटे में स्तनपान करवाया जाना चाहिए, जिसका मतलब है कि आपको 24 घंटों में उसे 8-10 बार माँ का दुग्ध पिलाने की आवश्यकता होती है। शिशु को जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए। माँ के दूध में महत्वपूर्ण पोषक तत्व (Important nutrients) और एंटीबायोटिक्स (antibiotics) होते हैं जो बच्चे के स्वस्थ रहने और विकास के लिए आवश्यक होते हैं। शिशु को कम से कम 10 मिनट के लिए स्तनपान कराएं। अपने बच्चे के होठों के पास स्तन को तब तक रखें जब तक वह मजबूती से पकड़ कर चूसने न लगे। यदि शिशु सही ढंग से स्तन को मुँह में लेता है, तो माँ को उसके निपल्स में कोई दर्द नहीं होगा।शिशु को दूध पिलाने के बाद स्तन कम भरा हुआ महसूस होना चाहिए। यह एक संकेत है कि शिशु को पर्याप्त दूध मिल रहा है। यदि स्तन का दूध शिशु को नहीं दिया जा सकता, तो शिशु को डॉक्टर द्वारा सुझाया गया फॉर्मूला दूध दें। बच्चे को हर बार दूध पिलाए जाते समय 60 से 90 मि.ली. फॉर्मूला दूध मिलना चाहिए।

डकार दिलाना To belch

शिशु को दूध पिलाने के बाद उसे डकार दिलाना जरूरी होता है। शिशु दूध पीते समय हवा निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में गैस (Acidity) हो जाती है और यह पेट के दर्द का कारण reason) बनता है। डकार दिलाने से यह अतिरिक्त हवा को बाहर निकालता है, इस प्रकार पाचन (digestion) में सहायता करता है और दूध उलटने और पेट के दर्द (Stomach ache) को भी रोकता है। शिशु को धीरे से एक हाथ से अपने सीने से लगा लें। उसकी ठोड़ी आपके कंधे पर टिकी होनी चाहिए। अपने दूसरे हाथ से उसकी पीठ को बहुत धीरे से थपथपाएं (Tapping) जब तक वह डकार ना ले।

अपने नवजात शिशु को कैसे पकड़ें How to hold your newborn

यह सुनिश्चित (make sure) करना बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप अपने बच्चे के सिर और गर्दन को एक हाथ से सहारा (Supporting the neck) देेते हुए उसे पकड़ रहे हैं। इसका कारण यह है कि उसकी गर्दन की मांसपेशियां (Neck muscles) अभी तक स्वतंत्र रूप से सिर को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से मजबूत नहीं हैं। रीढ़ की हड्डी (Spinal cord) अभी भी बढ़ रही है और मजबूत हो रही है। शिशु की गर्दन केवल 3 महीने की उम्र के बाद अपने दम पर सिर का संभालने में सक्षम होगी। इसलिए नवजात शिशु की देखभाल करते समय उसके सिर और गर्दन को सहारा देने पर ध्यान दें।

नाभिरज्जु के बचे हुए भाग की देखभाल Taking care of the remaining portion of the umbilical cord

पहले महीने (During first month) में नवजात शिशु की देखभाल का एक महत्वपूर्ण पहलू है नाभिरज्जु के बचे हुए भाग की देखभाल करना। शुरुआती 2-3 हफ्तों के लिए अपने शिशु को स्नान न कराएं। इसके बजाय गुनगुने पानी से उसे स्पंज स्नान दें। नाभि क्षेत्र को साफ और सूखा रखें। बच्चे के डायपर को नीचे मोड़ कर रखें ताकि नाभि सूख जाए। नाभि क्षेत्र में हाथ लगाने से पहले अपने हाथों को साफ करें। साफ करने के लिए नम कपड़े का उपयोग करें और एक साफ, शोषक कपड़े से उस क्षेत्र को सुखाएं। नाभि रज्जु के बचे हुए भाग के क्षेत्र में संक्रमण के संकेतों पर ध्यान दें। अगर वहाँ लालिमा, सूजन, बदबूदार निर्वहन (smelly discharge) या मवाद है, और नाभि क्षेत्र में खून बह रहा है तो शिशु को बाल–चिकित्सक (child hospital) को दिखाएं।

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डायपर से जुड़ी देखभाल Diaper care

प्रसव के बाद नवजात शिशु की देखभाल करते समय बार–बार डायपर बदलना एक महत्वपूर्ण पहलू important fact) है। अगर आपके शिशु को पर्याप्त मात्रा में आपका दूध या फार्मूला दूध मिल रहा है, तो वह नियमित रूप से मल त्याग के साथ–साथ एक दिन में कम से कम 6 से 8 डायपर गीले करेगा। जैसे ही उसका डायपर भरा हुआ महसूस हो, उसे बदल दें। आपको दिन में कम से कम 10 बार तक इसे बदलना पड़ सकता है। एक गंदे डायपर को बदलने के लिए, आपको एक चेंजिंग शीट, सौम्य डायपर वाइप्स, डायपर रैश क्रीम या बेबी पाउडर और साफ डायपर की आवश्यकता होगी। यू.टी.आई. को रोकने के लिए, अपनी शिशु को पीछे से आगे की ओर पोंछेने के बजाय आगे से पीछे की ओर पोंछें। फिर अपने बच्चे को प्रत्येक दिन कुछ घंटों के लिए डायपर के बिना रहने दें।

नहलाना Bathing

नवजात शिशु को नहलाना एक नाज़ुक काम है। आपको नाभिरज्जु के बचे हुए भाग के सूखने और गिरने के बाद सप्ताह में 2 से 3 बार शिशु को नहलाना शुरू करना चाहिए। सुनिश्चित (make sure) करें कि आपके पास शिशु को नहलाने से पहले स्नान कराने और कपड़े बदलने के लिए आवश्यक सभी सामान तैयार हो। सोने से ठीक पहले शिशुओं को स्नान कराना अच्छी और सुकून भरी नींद सोने में मदद करता है। आपको शिशु वाला बाथटब, गुनगुना पानी (warm water), सौम्य बेबी सोप या बॉडी वॉश, वॉशक्लॉथ , मुलायम तौलिया (soft towel), बेबी लोशन या क्रीम, नए डायपर और बच्चे के साफ कपड़ों की आवश्यकता होगी। अपने साथी या परिवार के किसी सदस्य की मदद लें, ताकि एक व्यक्ति शिशु की गर्दन और सिर को पानी के ऊपर रख सकेऔर दूसरा व्यक्ति शिशु को नहला सके। साबुन का इस्तेमाल संयम से करें। बच्चे के जननांगों, सिर, बालों, गर्दन, चेहरे और नाक के आस–पास किसी भी सूखे श्लेम को सूखे कपड़े से साफ करें। अपने बच्चे के शरीर को गुनगुने पानी से धोएं। ऐसा करने के बाद, बच्चे के शरीर को नरम तौलिए से सुखाएं। लोशन लगाएं और एक साफ डायपर और कपड़े पहनाएं।

मालिश करना To massage

मालिश आपके बच्चे के साथ आपके बंधन को मजबूत करने का एक शानदार तरीका है। यह शिशु को सुलाने में और रक्त परिसंचरण और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। अपने हाथों पर थोड़ी मात्रा में बेबी ऑयल या लोशन फैलाएं। अब, धीरे से उसके शरीर को सहलाएं। शिशु की आंखों में देखती रहें और उसके शरीर की मालिश करते समय उससे बात करें। शिशु की मालिश करने का सही समय उसके स्नान से पहले होता है।

सोना Sleeping

नवजात शिशु को पहले 2 महीनों में एक दिन में लगभग 16 घंटे सोने की आवश्यकता होती है। वे आमतौर पर 2 से 4 घंटे तक सोते हैं और यदि वे भूखे या गीले होते हैं तो जाग जाते हैं। जैसा कि बच्चे को हर 3 घंटे में दूध पिलाया जाना चाहिए, आपको उसे जगाकर दूध पिलाने की आवश्यकता हो सकती है। अगर शिशु, उतनी देर नहीं सोता जितना कि आम तौर पर उसकी उम्र के शिशु को सोना चाहिए, तो चिंता न करें। हर शिशु अलग होता है और उसकी नींद अलग होती है। सोते समय आपको अपने शिशु के सिर की स्थिति को बदलते (Changing condition) रहना चाहिए। यह सिर (head) चपटा होने से रोकता है। सुनिश्चित करें कि आप बच्चे को घुटन से बचाने के लिए उसे उसकी पीठ के बल सुलाएं। माँ को बच्चे के साथ झपकी (Napping) लेने की कोशिश करनी चाहिए। जब शिशु सो रहा हो तो आपस्नान करने के लिए या शांति से भोजन करने के लिए भी इस समय को इस्तेमाल कर सकती हैं।

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नाखून काटना Nail cutting

पैदा हुए बच्चे के नाखून बहुत तेजी से बढ़ते हैं। बच्चा अपने हाथों से अपने चेहरे या शरीर को खरोंच सकता है। इसलिए, बच्चे के नाखूनोंको काटना जरूरी है। शिशु के नाखून नरम होते हैं, इसलिए बच्चों वाली नाखून कतरनी का उपयोग करें। जब शिशु सो रहा हो तब नाखूनों को धीरे से काटें। इन्हें बहुत गहरे न काटें क्योंकि नाखून बहुत कोमल होते हैं और यह बच्चे के लिए दर्दनाक हो सकता है। नाखूनों के किनारों को न काटें क्योंकि इससे अंतर्वर्धित नाखून बन सकते हैं। नए माता–पिता को परिवार वालों या दोस्तों की मदद लेनी चाहिए ताकि वे आराम कर सकें और खुद की देखभाल भी कर सकें। पहली बार बने एक नवजात शिशु के माता–पिता शिशु के देखभाल संबंधी विभिन्न मुद्दों के बारे में काफी चिंतित हो सकते हैं। यह लेख नई माँओं को उनके नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए आत्मविश्वास देने में मदद करेगा।

  • अपने नवजात शिशु को पकड़ें आप यह सुनिश्चित करें की जब भी आप अपने बच्चे को पकड़ें तो उसके सिर और गर्दन को जितना हो सके उतना सहारा दें। आपको अपने बच्चे के सिर को इस तरह अपनी कोहनी के अंदर वाले भाग पर टिकाना चाहिए, ताकि उसका शरीर आपकी कलाई के ऊपर आराम करे।
  • उसका बाहरी कूल्हा और टांगों का ऊपरी हिस्सा इस तरह आपके हाथ पर आराम करे, ताकि आपके हाथ का अंदर वाला हिस्सा उसकी छाती और पेट पर आये। बच्चे को आराम से पकड़ें और अपना सारा ध्यान उसे दें। आप अपने बच्चे के पेट को अपनी छाती के ऊपर वाले हिस्से पर रख कर भी पकड़ सकते हैं, और उसी तरफ वाली बाजू से उसका शरीर पकड़ें ।
  • दूसरी बाजू से पीछे की तरफ से बच्चे के सिर को सहारा दें। अगर आपके बच्चे के छोटे भाई बहन या कसिनस है या वह उन लोगों के आसपास है जो बच्चों का ख़याल रखने से अपरिचित हैं,तो उन्हें ध्यान से बच्चे को पकड़ने के बारे में हिदायत दें और यह सुनिश्चित करें की उनके पास कोई जानकार व्यक्ति बैठा हो ताकी बच्चा सुरक्षित रहे।