गोस्वामी तुलसीदास का जीवन परिचय 💟 Biography of Goswami Tulsidas in Hindi

जीवन परिचय (1532-1623)

ऐसा माना जाता है कि तुलसीदास Tulsidaas का जन्म सन 1532 में बांदा जिले के राजापुर Rajapur of Banda district गांव में हुआ था| कुछ विद्वानों Scholars के अनुसार इनका जन्म सोरों Soron में हुआ था| और कुछ लोगो का कहना है की तुलसीदास जी का जन्म 1511 ई. में हुआ था। इनके जन्म स्थान के बारे में काफी मतभेद A lot of differences है, परन्तु अधिकांश विद्वानों के अनुसार इनका जन्म राजापुर, चित्रकूट जिला, उत्तर प्रदेश Rajapur, Chitrakoot District, Uttar Pradesh में हुआ था। इनके बचपन का नाम रामबोला था और इनके पिता जी का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। तुलसी दास के गुरु का नाम नर हरिदास था। तुलसीदास का बचपन बड़ी परेशानियों से गुजरा| वे पैदा होते ही अपने माता-पिता से बिछड़ गए थे| परिणाम स्वरूप उन्होंने भिक्षा प्राप्त कर अपना पोषण किया|

प्रारम्भिक जीवन

तुलसीदास जी के बारे में लोगो का यह भी मानना है की अक्सर लोग अपनी मां की कोख में 9 महीने रहते हैं लेकिन तुलसी दास जी अपने मां के कोख में 12 महीने तक रहे और जब इनका जन्म हुआ तो इनके दाँत निकल चुके थे और उन्होंने जन्म लेने के साथ ही राम नाम का उच्चारण किया जिससे इनका नाम बचपन में ही रामबोला पड़ गया। जन्म के अगले दिन ही उनकी माता का निधन हो गया। इनके पिता ने किसी और दुर्घटनाओं से बचने के लिए इनको चुनिया नामक एक दासी को सौंप दिया और स्वयं सन्यास धारण कर लिए। चुनिया रामबोला का पालन पोषण कर रही थी और जब रामबोला साढ़े पाँच वर्ष का हुआ तो चुनिया भी चल बसी। अब रामबोला अनाथों की तरह जीवन जीने के लिए विवश हो गया।कहा जाता है की गुरु नरहरिदास की कृपा से उन्हें राम भक्ति का मार्ग मिला|

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तुलसीदास जी का विवाह

29 वर्ष की अवस्था में राजापुर के निकट स्थित यमुना के उस पार तुलसीदास विवाह एक सुंदर कन्या रत्नावली के साथ हुआ। गौना न होने की वजह से वह कुछ समय के लिए काशी चले गए। काशी में रहकर हुए वेद वेदांग के अध्ययन में जुट गए। अचानक उनको अपनी पत्नी रत्नावली की याद सतायी और वह व्याकुल होने लगे तभी उन्होंने अपने गुरु से आज्ञा लेकर राजापुर आ गए।उनका अभी गौना नहीं हुआ था तो उनकी पत्नी मायके में ही थी, अंधेरी रात में ही यमुना को तैरकर पार करते हुए अपनी पत्नी के कक्ष पहुँचे गए। उनकी पत्नी ने उन्हें लोक-लज्जा के भय से वापस चले जाने के लिए आग्रह किया। उनकी पत्नी रत्नावली स्वरचित एक दोहे के माध्यम से उनको शिक्षा दी। ये दोहा सुनने के बाद तुलसी राम से तुलसी दास बन गए।रत्नावली से उनका विवाह होना और उनकी बातों से प्रभावित होकर तुलसीदास का गृह त्याग करने की कथा प्रसिद्ध है| किंतु इसका पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलता| पारिवारिक जीवन से विरक्त होने के बाद वे काशी, चित्रकूट, अयोध्या आदि तीर्थों में भ्रमण करते रहे|

रामचरितमानस की रचना

सन 1574 में अयोध्या में उन्होंने रामचरितमानस की रचना प्रारंभ की जिसका कुछ अंश उन्होंने काशी में लिखा| अपने अंत समय में तुलसीदास काशी में आकर रहने लगे और यही 1623 में उनका निधन हो गया| तुलसीदास एक मिलनसार कवि थे उन्हें लोक मंगल की साधना का कवि माना जाता है तुलसीदास का भाव जगत धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत व्यापक है|उसके बाद 1582 ई. में उन्होंने श्री रामचरितमानस लिखना प्रारंभ किया और 2 वर्ष 7 महीने 26 दिन में यह ग्रंथ संपन्न हुआ।

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रचनाए एवं कृतिया

मानव प्रकृति और जीवन जगत संबंधी गहरी अंतर्दृष्टि और व्यापक जीवन अनुभव के कारण ही वे रामचरितमानस में लोक जीवन के विभिन्न पक्षों का उद्घाटन कर सकें| मानस में उनके हृदय की विशालता भाव संसार की शक्ति और मर्मस्पर्शी स्थलों की पहचान की क्षमता पूरे उत्कर्ष के साथ व्यक्त हुई है तुलसी को मानस में जिन प्रसंगों की अभिव्यक्ति का अवसर नहीं मिला उनको उन्हें कवितावली, गितावली आदी में व्यक्त किया गया है| विनय पत्रिका में विनय और आत्म निवेदन के पद है इस प्रकार तुलसी के काव्य में विश्वयुद्ध और आत्म बोध का अद्वित्य समन्वय हुआ है|

भाव विचार काव्यरूप, छद्र विवेचन और भाषा की विविधता तुलसीदास की रचनाओं की विशेषताएं हैं| हिंदी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य रामचरितमानस को ही माना जाता है रामचरितमानस हिंदी का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य है इसकी रचना मुख्य दोहा और चौपाई छंद में हुई है| इसकी भाषा अवधी है गीतावली कृष्ण गीतावली और विनय पत्रिका पद शैली की रचनाएं हैं तो वही दोहावली स्फुट दोहो का संकलन है कवितावली कवित्त और सवैया छंद में रचित उत्कृष्ट रचना है ब्रज और अवधी दोनों ही भाषाओं पर `तुलसी का असाधारण अधिकार था| तुलसीदास 12 कृतिया प्रमाणिक मानी जाती है परंतु रामचरितमानस, कवितावली, गीतावली और विनय पत्रिका ही उनके प्रसिद्धि के आधार हैं|  तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के महान कवि थे, लोग तुलसी दास को वाल्मीकि का पुनर्जन्म मानते है। तुलसी दास जी अपने प्रसिद्ध कविताओं और दोहों के लिए जाने जाते हैं। उनके द्वारा लिखित महाकाव्य रामचरित मानस पूरे भारत में अत्यंत लोकप्रिय हैं। तुलसी दास जी ने अपना ज्यादातर समय वाराणसी में बिताया है। तुलसीदास जी की मृत्यु 1623 में हुई थी|