अग्रसेन की बावली के बारे में जानिये कुछ अनसुने राज़ Know some unheard secrets about Agrasen Baoli

अग्रसेन की बावली का इतिहास👻 History of Agrasen Baoli

देश की राजधानी Country capital व दिल, दिल्ली Delhi अपने भव्य इतिहास History और समृद्ध वर्तमान Rich present के लिए जाना जाता है। यह शहर city कई ऐतिहासिक स्मारकों Historical monuments को अपने में समेटे हुए, इतिहास और आज के समय का सबसे सटीक व अखंड मिश्रण Precise and monolithic mixture है। इन्हीं इतिहासों में से एक है दिल्ली के सबसे समृद्ध क्षेत्र कनॉट प्लेस Connaught Place में स्थित अग्रसेन की बावली Agrasen Baoli, जो यहाँ के निवासियों के रोज़ाना की ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा Important part है। यह ऐसे स्मारकों Monument में से एक है जिसका रहस्य secret अब भी इसके साथ बरक़रार है। अग्रसेन की बावली, क़रीब 60 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊँचा सीढ़ीनुमा कुआँ Step well है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण Archaeological Survey of India द्वारा संरक्षित Protected रखा गया है।

अग्रसेन की बावली से जुडी मान्यताएँ 🤲 Beliefs related to Agrasen Baoli

इस बावली के बारे में ऐसा विश्वास Belief है कि, महाभारत काल Mahabharata period में ही इसका निर्माण construction करवाया गया था। बाद में अग्रवाल समाज Agrawal society ने इस बावली का जीर्णोद्धार Renovations कराया। किसी ज़माने में दिल्ली और पुरानी दिल्ली के लोग यहाँ तैराकी swimming सिखने के लिए आते थे। बावली की स्थापत्य शैली Architectural style उत्तरकालीन तुग़लक़ तथा लोदी काल Late Tughlaq and Lodi periods (13वी-16वी ईस्वी) से मेल खाती है।लाल बलुए red sandstone पत्थर से बनी इस बावली  की वास्तु संबंधी विशेषताएँ Architectural features तुग़लक़ और लोदी काल की तरफ़ संकेत कर रहे हैं, लेकिन कहा जाता है कि इस प्राचीन बावली को अग्रहरि एवं अग्रवाल समाज के पूर्वज उग्रसेन Ugrasen, the forefather of Aghari and Agrawal society ने बनवाया था। इमारत monument की मुख्य विशेषता special features है कि यह उत्तर से दक्षिण north to south  दिशा में 60 मीटर लम्बी तथा भूतल पर 15 मीटर चौड़ी है।पश्चिम की ओर तीन प्रवेश द्वार युक्त एक मस्जिद Masjid है। यह एक ठोस ऊँचे चबूतरे Solid tall pops पर किनारों की भूमिगत दालानों से युक्त है। इसके स्थापत्य में व्हल मछली Whale fish की पीठ के समान’ छत, ‘चैत्य आकृति’ की नक़्क़ाशी Etching युक्त चार खम्बों pole का संयुक्त स्तम्भ, चाप स्कन्ध Joint column में प्रयुक्त पदक अलंकरण Medal adornment इसको विशिष्टता प्रदान करता है।

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स्थापत्य विशेषताएँ 🛠 Architectural features of The Baoli

कुछ इतिहासकारों Historians का मानना है कि 14वीं शताब्दी 14th century में इस बावली का निर्माण हुआ था। इसकी एक विशेषता यह भी है कि दिल्ली Delhi के कनॉट प्लेस Connaught Place के समीप हेली रोड Heli road के हेली लेन Heli Lane में स्थित यह बावली चारों तरफ़ से मकानों से घिरी है, जिससे किसी बाहरी व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि यहाँ कोई बावली है।

अग्रसेन की बावली एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है|  हैली रोड पर स्थित अनगढ़ तथा गढ़े हुए पत्थर से निर्मित यह बावली  प्राचीन समय की उत्कृट कला Fine art का नमूना है| ‘अग्रसेन की बावली’ से इंडिया गेट दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहाँ से जंतर मंतर Jantar Mantar  की दूरी 1.5 किमी है। इस प्रकार, दिल्ली की सभी बावलियों में से, यह एक मात्र ऐसी बावली है जहाँ सबसे आसानी से पहुँचा जा सकता है। यह स्मारक सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है और यहाँ आने के लिए किसी प्रकार के प्रवेश शुल्क Entry Ticket की आवश्यकता नहीं होती है|

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अग्रसेन की बावली के कुछ रोचक तथ्य 😎 Some interesting facts of Agrasen Baoli

1.भारत की राजधानी नई दिल्ली में स्थित इस बावड़ी की लम्बाई Length 60 मीटर Meter और यह 15 मीटर चौडी Width है|

  1. आम धारणा के अनुसार अग्रसेन की बावली का निर्माण राजा अग्रसेन द्वारा किया गया था, परंतु इसका कोई पुख्ता सबूत Evidence या ऐतिहासिक रिकॉर्ड Historical record नहीं है.

3. महाराजा अग्रसेन को महाभारत के समकालीन समय  Contemporary times का माना जाता है,  महाराजा अग्रसेन महाभारत के समय हरियाणा Haryana के प्राचीन शहर एग्रोहा Agroha में निवास करते थे|

  1. अग्रसेन की बावली में कुल 108 सीढ़ियां Stairs है और यह अपने में प्राचीन सभ्यता को संजोए है

  2. पुरातत्वीय स्थल Archaeological site और अवशेष अधिनियम Residue act 1958 के तहत इस स्मारक का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किया जाता है

6. साल 2012 में भारतीय डाक द्वारा अग्रसेन के बावली पर डाक टिकट भी जारी किया गया है.

  1. आपको जानकर हैरानी होगी अग्रसेन की बावली  के बारे में एक खास बात ये भी है की इसे भारत की भूतिया स्थलों Haunted landmarks में से एक माना जाता है.

8. अग्रसेन की बावली को कई फिल्मों में दिखाया गया है और यह दिल्ली में प्रसिद्ध फिल्म शूटिंगfilm shooting स्थानों में से एक है.‘अग्रसेन की बावली’ एक मशहूर हिन्दी बॉलीवुड Bollywood फिल्म ‘पीके’ PK में दर्शाए जाने के बाद राष्ट्रीय रूप से ध्यान में आई, इस फिल्म में बॉलीवुड के कुछ महान कलाकारों Bollywood actor जैसे कि आमिर खान, अनुष्का शर्मा और सुशांत सिंह राजपूत  ने अभिनय Acting किया है.

  1. माना जाता है की इस बाबड़ी को तुघलक काल Tughluq period के दौरान पुनर्निर्मित किया गया था। बावली की स्थापत्य शैली उत्तरकालीन  (13वी-16वी ईस्वी) तुग़लक़ तथा लोदी काल के समकालीन लगती है|

10. आपको जानकर हैरानी होगी इस बावली में एक प्राचीन काले पानी Black Water का कुआ Well है जिसमे वर्तमान समय में पानी सुख चूका है और अग्रसेन की बावली में नीचे उतरने पर एक गहरी चुप्पी और अँधेरा दिखाई देता है जिसे महसूस कर निडर इंसान भी डर कर भाग जाता है|

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काले पानी का रहस्य 🖤 The secret of black water

इस बावली Agrasen Ki Baoli के बारे में ऐसा कहा जाता है कि कई सालो पहले एक बार इस बावली  में काला पानी भर गया और उस जादुई काले पानी Magical Black Water ने कई लोगो को इस पानी में आत्महत्या Suicide के लिए मजबूर कर दिया | ऐसा माना जाता था कि उस काले पानी में सम्मोहन की शक्ति The power of hypnosis थी जिससे कई लोगो की जाने चली गयी |तब से अब तक ये बावड़ी हमेशा सुखी ही रहती है केवल बरसात Rainy के समय पानी भरा रहता है|

अग्रसेन की बावली के बारे में कहा जाता है कि पुराने समय में इस बावली का निर्माण पानी बचाने Save water के लिए किया गया था। एक समय में दिल्ली और पुरानी दिल्ली के लोग यहां तैराकी सीखने के लिए आते थे। एक समय में इस बावली  में काला पानी black water भर गया था। इसके बारे में कहा जाता है कि यह जादुई काला पानी Magical Black water यहाँ आने वाले लोगों को अपनी तरफ सम्मोहित कर आत्महत्या के लिए उक्साता था। हालांकि, आज के समय में यह कुआँ पूरी तरह से सूख गया है और केवल बरसात के समय यहाँ पानी भरा रहता है।