भारत में वस्तु एवं सेवा कर के बारे में जानिए 💰 India GST Goods and Services Tax All Information

क्या होता है GST ?

Introduction and Complete knowledge of GST आज के समय में वस्तु एवं सेवा कर Goods and Services Tax एक एसा कंसेप्ट बन गया है जिसके बारे में सुना तो सभी ने है, लेकिन जानकारी बहुत कम लोगों को प्राप्त है| इसी होच पोच को मिटने के लिए और आपको सही जानकारी प्रदान करने के लिए हम लेकर आये हैं GST के बारे में सारी, सटीक एवं सही जानकारी| GST भारत सरकार द्वारा देश में बेचीं जाने वाली वस्तुओ एवं सेवाओं पे वसूला जाने वाला कर (Tax) है| यह कर विक्रेता (Seller) और उपभोगता (Consumer) दोनों पर एक साथ लगाया जाता है| इसका भुगतान विक्रेता को सीधा सरकार को करना होता है| भारत सरकर ने पूर्व में लिए जाने वाले Sales Tax, Value Added Tax, Stamp Duty, Central Sales Tax जेसे कई सारे टैक्सेज को जोड़ कर एक सिंपल टैक्स में कन्वर्ट कर दिया है| इसे भारत सरकार ने 1 जुलाई 2017 को चार अलग टैक्स स्लैब्स (5%, 12%, 18% और 28%) के साथ लागु किया था|

GST किसे लेना चाहिए –

जो लोग वार्षिक रूप से 40 लाख रुपये से अधिक की टर्नओवर प्राप्त करते हैं, उन्हें अपने व्यवसाय के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक होता है। कुछ राज्यों में यह सीमा 20 लाख रुपये से भी कम होती है। नॉर्मली ऑनलाइन बिज़नस और इम्पोर्ट एक्सपोर्ट के काम के लिए भी GST अनिवार्य होता है| इसलिए, यदि आप इस टर्नओवर सीमा से ऊपर होते हैं, या आप किसी ऑनलाइन  व्यवसाय में भाग लेना चाहते हैं तो आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

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GST रजिस्ट्रेशन कैसे करे-

सरकार द्वारा बनायीं गयी https://www.gst.gov.in/ पर लॉग इन करके आसानी से GST सर्टिफिकेट और GSTIN प्राप्त किया जा सकता है| GST के लिए आवेदन करने के लिए आपको किसी भी तरह की फीस या डिपाजिट अमाउंट सबमिट नहीं करना होता| GST को आप दो अलग केटेगरी में अप्लाई कर सकते है:-

  1. कम्पोजीशन स्कीम Composition Scheme – इसमें आपको हर तीन महीने में (Quarterly) GST return फाइल करना पड़ता है| यह मुख्यतः छोटे व्यापारियों के लिये उपयोगी स्कीम है|
  2. नॉन-कम्पोजीशन स्कीम Non-Composition Scheme– इसमें आपको हर महीने में एक (Monthly) GST return फाइल करना पड़ता है| यह मुख्यतः छोटे व्यापारियों के लियो उपयोगी स्कीम है|

GST के प्रकार –

GST मुख्यतः तीन तरह के होते है:-

  1. CGST – यह टैक्स केंद्र सरकार द्वारा चार्ज किया जाता है, यह टोटल चार्टैजेबल टैक्स का आधा होता है| उदहारण के लिए अगर किसी  वस्तु का 18% टैक्स चार्ज किया जाता है तो CGST का भाग उसमे 9% होगा|
  2. SGST – यह टैक्स राज्य सरकार द्वारा चार्ज किया जाता है, और यह टैक्स भी टोटल टैक्स का आधा होता है|
  3. IGST – यह टैक्स नॉर्मली उन प्रोडक्ट्स पर चार्ज किया जाता है जो या तो किसी इम्पोर्ट एक्सपोर्ट के भाग हो या फिर किसी केंद्र शाशित प्रदेश में बेचे जा रहे हो|
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GST के फायदे –

  1. एकीकृत कर: GST ने भारत में सभी करों को एकीकृत कर दिया है, जिससे टैक्स संबंधी प्रक्रियाएं सरल हो गई हैं|
  2. अधिकतम उत्पादकता: GST ने उत्पादकता में वृद्धि करने में मदद की है, क्योंकि अब समान रूप से टैक्स लागू होने से व्यापक दुकानदारों और व्यवसायियों को भय नहीं होता है कि उनके उत्पादों की मूल्य में विस्तृत तरीके से बदलाव होगा।
  3. कम ब्यौरा: GST ने कर व्यवस्था के संबंध में ब्यौरा कम कर दिया है, जो बिजनेस प्रक्रियाओं को सुगम बनाता है। क्कुनकी अब व्यवसाइयो को बहुत सरे रिकार्ड्स नहीं रखने पड़ते|
  4. अधिक समझौते: GST ने दो राज्यों या क्षेत्रों के बीच वस्तु और सेवा कर के संबंध में नैतिक और आर्थिक समझौते करने की अवधि को कम कर दिया है।
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GST के नुकसान-

  1. करों के बढ़ते तनाव: GST के लागू होने से पहले, कुछ राज्यों में समान वस्तु और सेवाओं पर केंद्र और राज्य सरकारों के अलग-अलग कर होते थे। GST के लागू होने से पहले के समय में अलग-अलग कर देने की वजह से व्यापारियों को टैक्स संबंधी तनाव का सामना करना पड़ता था।
  2. एकीकरण के लिए अधिक व्यवस्थाएं: GST के लागू होने से पहले व्यवसायों को केंद्र और राज्य कर भुगतान करना पड़ता था, इसलिए व्यापारियों को अब एकीकृत टैक्स का भुगतान करना पड़ता है। यह एकीकरण करने के लिए व्यवस्थाएं जोड़ने की जरूरत होती है जो व्यापारियों के लिए कठिन हो सकती है।
  3. टैक्स फ्रॉड: GST लागू होने के बाद टैक्स फ्रॉड का मामला बढ़ गया है। कुछ लोग नकली बिल बनाकर टैक्स भुगतान करते हैं, जिससे असली उत्पादक टैक्स नहीं भुगतान करते हैं।
  4. उच्च टैक्स दर: GST टैक्स दर अधिक हो सकती है, जो कुछ उत्पादों की मूल्य में वृद्धि कर सकता है।